Biology (NTSE/Olympiad)  

3. परिवहन

दोहरा रूधिर परिसंचरण

दोहरे रूधिर परिसंचरण के 2 भाग होते है -

फुफ्फुसीय चाप:
इस प्रकार के परिसंचरण में रक्त हृदय से फेफड़ो तक तथा पुन: फेफड़ो से हृदय पहुँचता है। ऑक्सीजन रहित रक्त दायें आंलिद तथा दायें निलय में प्रवेश करता है। पल्मोनरी शिरा द्वारा रक्त दायें निलय से फेफड़ो में प्रवेश करता है।
दैहिक चाप:
इस प्रकार के परिसंचरण में रक्त हृदय तथा शरीर के विभिन्न भागों के बीच संचरित होता है ऑक्सीजन युक्त रक्त आलिन्द से बायें निलय में पहुँचता हैं बायां निलय रक्त को पूरे शरीर में महाधमनी द्वारा पम्प करता है।
दोहरा परिसंचरण एकल परिसंचरण की तुलना में अत्यन्त महत्वूपर्ण होता है। क्योंकि O2 युक्त तथा O2 रहित रूधिर अलग-अलग रहता है। वर्ग एम्फीबिया तथा वर्ग रेप्टीलिया में रक्त के मिश्रण के कारण दोहरा परिसंचरण अपूर्ण होता है। स्तनियों तथा पक्षियों में ये पूर्ण होता है।

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