Biology (NTSE/Olympiad)  

7. वंशागति तथा उद्विकास

लिंग निर्धारण

यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति के लिंग को निर्धारण होता है। आनुवांशिकी एक व्यक्ति के लिंग के निर्धारण में भाग लेती है। जिसे निम्न प्रकार से समझाया जाता है:
एक नर में एक X गुणसूत्रा तथा एक Y गुणसूत्रा होता है, अर्थात् आधे नर युग्मक या शुक्राणु में X गुणसूत्रा तथा दूसरे आधे में Y गुणसूत्रा होता है।
एक मादा में दो X गुणसूत्रा होते है अर्थात सभी मादा युग्मको या अण्डाणुओं में केवल X गुणसूत्रा होगें।
एक बच्चे का लिंग निषेचन में क्या घटित हुआ पर निर्भर होता है।
यदि एक शुक्राणु जिसमें X गुणसूत्रा होता है, एक अण्डाणु जिसमें X गुणसूत्रा होता है, के साथ निषेचित होता है तो उत्पन्न बच्चा एक लड़की होगा।
यदि एक शुक्राणु जिसमें Y गुणसूत्रा होता है, एक अण्डाणु जिसमें X गुणसूत्रा होता है, के साथ निषेचित होता है तो उत्पन्न बच्चा एक लड़का होगा।
इस प्रकार शुक्राणु, बच्चे के लिंग का निर्धारण करते है।
कुछ जन्तुओं में लिंग का निर्धारण वातावरणीय कारको द्वारा भी नियंत्रितकिया जाता है।
उदाहरण के लिए कुछ सरीसर्पो जैसे समुद्री कछुआ में उच्च ताप का ऊष्मायन मादा संतति को विकसित करते है। जबकि छिपकलीयों की स्थिति में उच्च ताप का ऊष्मायन के परिणाम स्वरूप नर संततिया होती है।

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