Biology (NTSE/Olympiad)  

4. उत्सर्जन

मूत्रा निर्माण की क्रिया विधि

मूत्रा निर्माण की क्रियाविधि में मुख्य 4 चरण सम्मिलित होते हैं - परानिस्यन्द, चयनात्मक पुन: अवशोषण, स्त्रावण तथा सान्द्रण।
(i) परानिस्यन्द : ग्लोमेरूलस में अभिवाही धमनी के सक्रिय होने के कारण रक्त दबाव के साथ बहता है। जिसके फलस्वरूप रक्त का परानिस्यंदन हो जाता है। विलेय की मात्रा तथा जल का अवशोषण होने के बाद वह बोमेन केप्सूल में प्रवेश करता है। इस निस्यंद को ग्लोमेरूलर निस्यंद कहते हैं।
(ii) पुन: अवशोषण : ग्लोमेरूलर निस्पंद को प्रारम्भिक मूत्रा भी कहते हैं। यह बोमेन सम्पुट से समीपस्थ कुण्डलित नलिका में स्थानान्तरित होता है। जो कि रक्त कोशिकाओं के जाल द्वारा घिरी होती है। तत्पश्चात् ग्लोमेरूलर निस्यंद से सभी आवश्यक पदार्थों जैसे ग्लूकोस, अमीनो अम्ल, विटामिन C, कैल्शियम, पौटेशियम क्लोराइड, बाइकार्बोनेट तथा जल का अवशोषण हो जाता है। पुन: अवशोषण की क्रिया दूरस्थ कुण्डलित नलिका में भी संपन्न होती है।

यदि आप भी दुसरे स्टूडेंट्स / छात्र को ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी देना चाहते है तो इसे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर अधिक से अधिक शेयर करे | जितना ज्यादा शेयर होगा, छात्रों को उतना ही लाभ होगा | आपकी सुविधा के लिए शेयर बटन्स नीचे दिए गए है |

×

एन. टी. एस. ई . Biology (कक्षा X)


एन. टी. एस. ई . Biology (कक्षा IX)


विस्तार से अध्याय देखें

भौतिक विज्ञान CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

रसायन विज्ञान CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

भूगोल CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

जीव विज्ञान CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

लोकतांत्रिक राजनीति CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

अर्थशास्त्र CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें

इतिहास CBSE कक्षा 9th व 10th कोर्स देखें