Biology (NTSE/Olympiad)  

2. श्वसन तंत्र

पादपों में श्वसन

जड़ो द्वारा: मृदा कणों के मध्य रिक्त स्थानों में वायु उपस्थित होती है। मूल रोम इस वायु के संपर्क में होती है। मृदा वायु में उपस्थित O2 मूल रोम में विसरित हो जाती है तथा अन्त: कोशिकाओं तक पहुँच जाती है। इसी प्रकार कोशिकाओं में उत्पन्न हुर्इ CO2 विपरित दिशा में विसरण द्वारा बाह्य वातावरण में मुक्त हो जाती है।

पर्ण द्वारा: पर्ण तथा तरूण स्तम्भ गैसों के आदान प्रदान हेतु उपयुक्त होते हैं । इन पर अपारगम्य झिल्ली का आवरण पाया जाता है जो जल की हानि को कम करता है। इनकी अधिचर्म पर छोटे-छोटे वायवीय छिद्र पाये जाते हैं जिन्हें स्टोमेटा अथवा पर्णरंध्र कहते हैं। प्रत्येक वातरंध्र द्वार कोशिकाओं द्वारा घिरा होता है। द्वार कोशिकाऐं वृक्क के आकार की होती है। जिनकी भीतरी भित्ती बाहरी भित्ती की अपेक्षा मोटी होती है।
जब पर्ण रंध्र खुली अवस्था में होते हैं, गैस बाहरी वातावरण में सांद्रता के अनुसार पर्ण में प्रवेश तथा पर्ण से बाहर निकल जाती है बाहर से प्रवेश करने के पश्चात् वायु सर्वप्रथम वायु कोष्ठ में प्रवेश करती है तत्पश्चात् अन्त: कोशिकाओं में विसरित हो जाती है।
यदि पर्ण रंध्र रात्रि के समय खुले रहते हैं। तो O2 बाहर वातावरण से पर्ण में तथा CO2 पर्ण से बाहर वातावरण में विसरित हो जाती है।

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