Biology (NTSE/Olympiad)  

7. वंशागति तथा उद्विकास

उद्विकास

उद्विकास (L.evolvere – to unfold) या जैव उद्विकास (स्पेन्सर, 1852) प्रकृति का खुलना है जिसमें परिवर्तनों के द्वारा पूर्व अस्तित्व वाले जीवों से किसी भी प्रकार के जीवों का विकास होता है।
अर्जित लक्षण: अर्जित लक्षण वे विभिन्नतायें होती है जो एक व्यष्ठि में वातावरणीय कारकों के प्रभाव में, अंगो के उपयोग व अनुपयोग सजग प्रभावों के कारण इनके जीवनकाल के दौरान विकसित होते है।
उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिन्द्वात (लैमार्कवाद): यह उद्विकास का प्रथम सिद्धान्त है जिसे फ्रांसिसी जीवविज्ञानी जीन बेपट्ीस्ट डी लैमार्क द्वारा प्रस्तावित की गर्इ यह निम्न पर आधारित है।
आंतरिक जैविक बल: सजीवों में एक जैविक बल होता है जो उनकी प्रवृत्ति को परिवर्तित कर, सामान्यतया उनको वृहद तथा अधिक जटिल बनाता है।

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