Chemistry (NTSE/Olympiad)  

1. धातु एवं अधातु

याद रखने योग्य बिन्दु (धातु एवं अधातु)

♦ धातुये, चमकीली, आघातवर्द्धनीय, तनन तथा उच्च घनत्व रखती है।
♦ धातुये, सामान्यतया ऊष्मा तथा विध्युत की अच्छी चालक होती है।
♦ धातु इलेक्ट्रॉन मुक्त करके धनात्मक आयन बनाती है।
♦ सभी धातुये, ऑक्सीजन के साथ जुड़कर धातु ऑक्साइड़ बनाती है।
♦ धातु के ऑक्साइड़ क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
♦ धातुये, क्लेरीन से क्रिया करके धातुओं के विध्युत संयोजी क्लोराइड़ बनाती है।
♦ धातुये जैसे Li, Na तथा Ca हाइड्रोजन के साथ हाइड्राइड़ बनाती है।
♦ ये भू-पर्पटी के नीचे स्थित धातु युक्त पदार्थों के रूप में होती है। जिन्हें खनिज कहते है।
♦ खनिज जो धातुओं से बनते है तथा लाभ के लिए प्रयुक्त हो सकते हैं। उन्हें अयस्क कहते है।
♦ गालक वह पदार्थ होता है जिसे भट्टी में मिलाने पर अयस्क में उपस्थित अगलनीय अशुद्धियों को हटाता है।
♦ Flux combines with the nonfusible impurity to convert it into a fusible substance known as slag.
♦ सामान्यतया अधातुये ऊष्मा तथा विध्युत की बुरी चालक होती है।
♦ सभी अधातुये विध्युत ऋणाविशत होती है।
♦ लोहे के निष्कासन में चूने पत्थर का कार्य, धातुमल CaSiO3 के निर्माण के लिए कैल्शियम ऑक्साइड़ (CaO) देता है।
♦ मिश्रधातु स्टील को निकेल, कॉबाल्ट, क्रोमियम, टँगस्टन, मॉलीवडेनेम, मैग्नीज या सिलिकन की अल्प मात्रा को स्टील में मिलाकर बनाया जाता है।
♦ स्टील को रक्त होने तक गर्म करने तथा धीरे-धीरे ठण्डा करने को स्टील का तापीयन कहलाता है।
♦ लोहे का जंग लगना एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है जो वायु तथा जल की उपस्थिति में होती है।
♦ एल्युमिनियम भू-पर्पटी में मिलने वाली मुख्य धातु है।
♦ धातुओं को उनके अयस्कों से पृथक् करने का प्रक्रम तथा उनके उपयोग के लिए परिष्करण/शोधक को धातुकर्म कहते है।
♦ अयस्क में उपस्थित अवांछित पदार्थ, अधात्राी कहलाती है।
♦ झाग प्लवन, कुछ अयस्कों के सान्द्रण के लिए प्रयुक्त विधि होती है।
♦ निस्तापन एक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को अधिक गर्म किया जाता है जिसमें वाष्प्शील अशुद्धियाँ हट जाती है।
♦ भर्जन एक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को नियंत्रितवायु व नियंत्रितताप पर गर्म किया जाता है।
♦ प्रगलन, धातु को इनकों यौगिकों से प्राप्त करने की प्रक्रिया है।
♦ बॉक्साइट एक अयस्क है जिसमें एल्युमिनियम धातु को औद्योगिक रूप से प्राप्त किया जाता है।
♦ एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Al2O3 2H2O) होता है।
♦ धातुये, वायु, कार्बन डार्इऑक्साइड़, आदर््रता आदि की क्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। इसे धातुओं क्षरण कहते है।
♦ दो या अधिक धातुये या एक धातु व एक अधातु से एक मिश्रधातु का निर्माण होता है। काँसा, ताँबा व जस्ते की एक मिश्रधातु है।
♦ एक धातु का वह गुण जो इसे दो या अधिक रूप में बनाये रखता है। अपररूप कहलाता है।
♦ कॉपर का अधिक महत्वपूर्ण अयस्क कॉपर पायराइट (CuFeS2) होता है।
♦ जब कॉपर को 300°C पर गर्म किया जाता है तो क्यूप्रिक ऑक्साइड़ बनता है जबकि (CuO) पर क्युप्रस ऑक्साइड़ (Cu2O) बनता है।
♦ सिल्वर, जल तथा हाइड्रोक्लोरिक से क्रिया नहीं करती। यद्यपि ये नाइट्रिक अम्ल से क्रिया करके NO2 गैस बनाती है।
♦ गोल्ड़ हमेशा अम्लराज में घुलता है। अम्ल राज हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा सान्द्र नाइट्रिक अम्ल का 3 : 1 अनुपात में आतनन होता है।
♦ लेड को रगड़ने पर पेपर पर निशाना बनाता है। लेड़, उपमा का बहुत कम चालक होता है।
♦ जब जस्ते को सोडियम हाइड्रॉक्साइड़ के सान्द्र विलयन के साथ गर्म करने पर हाइड्रोजन गैस देती है। जबकि सोडियम जिंकेट, विलयन में बच जाता है।
♦ सल्फर का उपयोग रबड़ के वल्केनीकरण में होता है।

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