Chemistry (NTSE/Olympiad)  

1. धातु एवं अधातु

महत्वपूर्ण पद एवं अवधारणा

1. धातु : वे तत्व जिसमें आसानी से इलेक्ट्रॉन की कमी हो सकती हैं तथा धनायन बनाती है। ये मुख्यत: ठोस होती है तथा उच्च घनत्व रखती है। ये उच्च गलनांक व क्वथनांक रखती है। ये धात्विक चमक तथा ये श्रव्य होती है, अर्थात् धात्विक आवाज उत्पन्न करती है। ये ऊष्मा एवं विध्युत के अच्छे चालक होती है। ये प्राय: आघातवर्धनीय एवं तन्य होते है, अर्थात् गोल्ड (सोना), चांदी, कॉपर, टिन, लेड, लोहा, मर्करी, कॉबाल्ट, निकिल, एल्युमिनियम, सोडियम, पोटेशियम धातुएँ है।
2. कठोरता : अधिकांशत: धातुऐं कठोर होती है। यदि आप इसे चाकू से काटने की कोशिश करे, तो ये अधिकांश धातुओं में संभव नहीं है। कुछ धातुऐं जैसे सोडियम, पोटेशियम मुलायम धातुऐं हैं तथा चाकू से काटी जा सकती हैं।
3. आघातवर्धनीयता : धातुओं की वह क्षमता जिसके कारण इन्हें परतों में ढ़ाला जा सकता है आघातवर्धनीयता कहलाती है। आयरन, कॉपर, जिंक, एल्युमिनियम, मैग्निशियम परतों के रूप में उपलब्ध होती हैं। एल्युमिनियम, स्टील, कॉपर ब्रास (कांसा), ब्रोंज (पीतल) बर्तन बनाने में प्रयुक्त होते हैं।
ब्रास व ब्रोंज मूर्तियाँ बनाने के लिए भी प्रयुक्त होती है। ब्रोंज मेडल बनाने के लिए उपयोगी है। एल्युमिनियम एवं सिल्वर धातुऐं वर्क (परत) में रूपांतरित होती है। एल्युमिनियम का वर्क (परत) बांधने में (पैक करने में) उपयोगी है जबकि चांदी का वर्क मिठार्इयों को सजाने में उपयोगी है।
4. तन्यता : धातुओं की वह क्षमता जिसके कारण उन्हें तारों में बदला जा सकता है। कॉपर, एल्युमिनियम, आयरन को तारों में बदला जा सकता है। सिल्वर, स्वर्ण व प्लेटिनम उच्च तन्य धातुऐं हैं। स्वर्ण के 1 ग्राम को 2 km लम्बे तार में बदला जा सकता है।
5. प्रवाह का प्रभाव (ध्वन्य): जब धातुऐं कठोर पदार्थ से टकराती है तो वे ध्वनि उत्पन्न करती है अर्थात् ये ध्वन्य (sonorous) होती है। काँसा (Brass) तथा ताँबा (bronz) उच्च ध्वन्य होती है। ये घण्टिया तथा ताल वाद्य बनाने में प्रयुक्त होती है।
6. विध्युत चालकता : यह वह गुण हैं जिसके कारण विध्युत, धातुओं में प्रवाहित हो सकती है। यह मुक्त इलेक्ट्रॉनों या गतिशील इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। जैसे- कॉपर, सिल्वर, गोल्ड, एल्युमिनियम आदि विध्युत की अच्छी चालक है। सिल्वर, विध्युत की सबसे अच्छी चालक है। इसके पश्चात् क्रमश: कॉपर, गोल्ड़, एल्युमिनियम तथा टंगस्टन होती है। पारा तथा लेड़, उच्च प्रतिरोध के कारण विध्युत के कम चालक होते है।
7. उष्मीय चालकता : यह वह गुण है जिसके कारण धातुयें उष्मा की चालक होती है। जैसे - कॉपर, सिल्वर, एल्युमिनियम, गोल्ड तथा आयरन उष्मा के अधिक चालक होते हैं।
8. धात्विक चमक : अधिकांश धातुओं की परत चमकीली होती है। अर्थात् ये धात्विक चमक दर्शाती है। जैसे Au, Ag, Pt चमकीली होती है।

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