Economics (NTSE/Olympiad)  

2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्राक

प्राथमिक क्षेत्राक का महत्व

1. द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्राक पर्याप्त नौकरियों के लिए असफल हैं।
2. यद्यपि औद्योगिक मान अथवा माल का उत्पादन में समय के दौरान आठ गुना वृद्धि हुर्इ, व्यवसाय में रोजगार में केवल 2.5 गुना वृद्धि हुर्इ।
3. मुख्य रूप से कृषि में प्राथमिक क्षेत्राक में अब भी कार्यरत देशों में श्रमिकों के आधे से अधिक GDP के केवल चौथार्इ का उत्पादन कर रहे है।
4. ‘प्राथमिक सेवाओं में कार्यरत भारत में लोगो का बहुमत :
भारत विकसित देश है। यह विश्व के अनेक अर्थशािस्त्रायों द्वारा घोषित हो चुका है कि भविष्य में भारत अधिक शक्ति वाला देश होगा। आज भी भारत में अधिक संख्या में लोग प्राथमिक व्यवसायों में कार्यरत है क्योंकि मानव व्यवसाय निश्चित क्षेत्रा के भौगोलिक पर्यावरण द्वारा प्रभावित है। विश्व के विभिन्न भागों में रह रहे लोग उन व्यवसायों का चयन करते है जो इनके भौगोलिक पर्यावरण के बीच हो इनको आसानी से सहायता करे तथा आवश्यक सामग्री आसानी से मिल सकती हो। भारत अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को प्राप्त करने में प्रयासरत है तथा अधिक मात्रा में वस्तुओं को उत्पादित करने का समय नहीं है तथा विज्ञान एवं तकनीकी में उपयोगी नहीं बना सकता। विकसित देशों में विकास की गति बहुत धीमी है, क्योंकि तुल्नात्मक रूप से तृतीयक व्यवसायों में लोगो की बहुत कम संख्या कार्यरत है।

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