Economics (NTSE/Olympiad)  

3. मुद्रा तथा साख

ऋण की शर्तें

ब्याज दर :
हर ऋण समझौते में ब्याज दर निश्चित कर दी जाती है, जिसे कर्ज़दार महाजन को मूल रकम के साथ अदा करता है।
यहाँ ब्याज दर के दो प्रकार है :
(a) स्थार्इ : यह दर स्थार्इ है तथा ऋण काल के दौरान परिवर्तित नहीं होती है।
(b) अस्थार्इ : यह दर बैंकों की योजना तथा R.B.I. की योजना के अनुसार परिवर्तित होती है।
कर्ज़ जाल :
यह ऐसी स्थिति है जो कर्जदार को एसी परिस्थिति में धकेल देती है जहाँ से बाहर निकलना काफी कष्टदायक होता है।
समर्थक ऋणाधार :
यह ऐसी सम्पति है, जिसका मालिक कर्जदार है (जैसे, कि भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में पूंजी) और इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारंटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता। यदि कर्जदार उधार वापस नहीं कर पाता, तो उधारदाता को भुगतान प्राप्ति के लिए सम्पत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।

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