Geography (NTSE/Olympiad)  

3. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

अंतराष्ट्रीय व्यापार

व्यापार :
राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान व्यापार कहलाता है।
बाजार :
बाजार एक ऐसी जगह है जहाँ इसका विनिमय होता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार :
दो देशों के मध्य यह व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। यह समुद्री, हवार्इ व स्थलीय मार्गों द्वारा हो सकता है।
व्यापार का महत्त्व :
1. कोर्इ भी देश अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के बगैर नहीं हो सकता है क्योंकि संसाधन सीमित क्षेत्रा में है।
2. एक देश के अंतराष्ट्रीय व्यापार की प्रगति उसके आर्थिक वैभव का सूचक है।
3. विदेशी आदान-प्रदान से हम अधिक पूंजी अर्जित कर सकते हैं। जो कि अनेक आवश्यक पदार्थों के निर्यात के लिए आवश्यक होता है।
4. आयात तथा निर्यात व्यापार के दो घटक हैं।
व्यापार संतुलन : आयात व निर्यात का अंतर ही व्यापार संतुलन कहलाता है।
अनुकूल व्यापार संतुलन :
अगर निर्यात मूल्य आयात मूल्य से अधिक हो, तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।
व्यापार असंतुलन :
निर्यात की अपेक्षा अधिक आयात, असंतुलित व्यापार कहलाता है।
विश्व के सभी भौगोलिक प्रदेशों तथा सभी व्यापारिक खंडो के साथ भारत के व्यापारिक संबंध है। निर्यात वृद्धि वाली वस्तुएँ- कृषि वर्षों से संबंधित उत्पाद, खनिज व अयस्क, रत्न व जवाहरात आदि हैं। आयातित वस्तुओं में पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम उत्पाद, मोती व बहुमूल्य रत्न आदि हैं, जो कि मूल्यवान हैं। इस प्रकार से व्यापार का सम्पूर्ण संतुलन प्रतिकूल होता है।

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