Geography (NTSE/Olympiad)  

1. संसाधन एवं विकास

भारत में भू-उपयोग प्रारूप

भू-उपयोग निर्धारित करने वाले तत्व :
1. भौतिक कारक : भू-आकृति, जलवायु और मृदा के प्रकार।
2. मानवीय कारक : जनसंख्या घनत्व, प्रौद्योगिक क्षमता, संस्कृति और परंपराएं आदि।
3. भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्राफल 32.8 लाख वर्ग किमी. है। परंतु इसके 93 प्रतिशत भाग के ही भू-उपयोग आँकड़े उपलब्ध हैं क्योंकि पूर्वोत्तर प्रांतों में असम को छोड़कर अन्य प्रांतों के सूचित क्षेत्रा के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान और चीन अधिकृत क्षेत्रों के भूमि उपयोग का सर्वेक्षण भी नहीं हुआ है।

(a) शुद्ध (निवल) बोये गए क्षेत्रा का प्रतिशत भी विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न है।
(b) पंजाब और हरियाणा में 80 प्रतिशत भूमि पर खेती होती है, परंतु अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 10 प्रतिशत से भी कम क्षेत्रा बोया जाता है।
(c) हमारे देश में राष्ट्रीय वन नीति (1952) द्वारा निर्धारित वनों के अंतर्गत 33 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्रा वांछित हैं। जिसकी तुलना में वन के अन्तर्गत क्षेत्रा 22 प्रतिशत है। वन नीति द्वारा निर्धारित यह सीमा पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। वन क्षेत्रों के आस पास रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका इस पर निर्भर करती है।
(d) बंजर भूमि में पहाड़ी चट्टानें, सूखी और मरूस्थलीय भूमि शामिल है।

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