Geography (NTSE/Olympiad)  

3. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

भारतीय सड़क परिवहन की समस्याऐं

1. टे्रफिक की मांग तथा सघनता के सापेक्ष भारत में सड़क परिवहन का जल अपर्याप्त होता है।
2. अधिकतर सड़क परिवहन की स्थिति बहुत बुरी होती है। यह वर्षा के समय गंदे हो जाते हैं।
3. शहरों में यह अत्यधिक संकीर्ण होते हैं।
4. सर्वाधिक राजमार्गों की तरफ टेलिफोन बूथ, पुलिस स्टेशन आदि सुविधाओं की कमी होती हैं।
1. स्वर्णिम चतुभ्र्ाुज महाराजमार्ग : ट्रेफिक की तेज गति की आवश्यकता को पूरा करने लिए महाराजमार्ग बनाए गए हैं। भारत सरकार ने दिल्ली-कोलकात्ता, चेन्नर्इ-मुंबर्इ व दिल्ली को जोड़ने वाली 6 लेन वाली महाराजमार्गों की सड़क परियोजना प्रारम्भ की हैं। इस परियोजना के तहत दो गलियारे प्रस्तावित हैं। प्रथम उत्तर-दक्षिण गलियारा जो श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है तथा द्वितीय जो पूर्व-पश्चिम गलियारा जो सिलचर (असम) तथा पोरबंदर (गुजरात) को जोड़ता है।
वृहत् उद्देश्य : बड़े शहरों के मध्य समय तथा दूरी को कम करते हैं। यह राजमार्ग परियोजना भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India) के अधिकार क्षेत्रा में है।
2. राष्ट्रीय राजमार्ग : ये प्राथमिक सड़क तंत्रा है जिनका निर्माण व रखरखाव केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (Central Public Works Department (C.P.W.D.)) के अधिकार क्षेत्रा में है। राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में जाने जाते हैं। यह एक राज्य को दूसरे राज्य से जोड़ते हैं।
मुख्य लवण :
1. आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को यह बनाए रखते हैं।
2. राष्ट्रीय राजमार्ग के कारण एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार सम्भव हो पाता हैै।
3. सभी आवश्यक सामग्री (उत्पाद) का परिवहन इन सड़कों के माध्यम से आसानी से हो जाता है।
3. राज्य मार्ग :
1. इनका निर्माण तथा रखरखाव राज्य सरकार द्वारा होता है।
2. राज्यों की राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें राज्य राजमार्ग कहलाती हैं।
3. भारत में राज्य राजमार्ग की कुल लम्बार्इ लगभग 4 लाख के बराबर होती है।
4. राज्य के विकास में यह योगदान देते हैं।
4. जिला मार्ग :
1. ये सड़कें जिले के विभिन्न प्रशासनिक केंद्रो को जिला मुख्यालय से जोड़ती हैं।
2. इसकी कुल लम्बार्इ 6 लाख कि.मी. के लगभग है।
3. जिला परिषद के द्वारा इसका रखरखाव होता है।
5. गाँव सड़कें :
1. इस वर्ग के अंतर्गत वे सड़कें आती हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं।
2. प्रधानमंत्राी ग्रामीण सड़क परियोजना के तहत इन सड़कों के विकास को विशेष प्रोत्साहन मिला है।
3. गाँवों के विकास में यह जैविक भूमिका निभाते हैं।
4. यह किसानों की अपने उत्पादकों को शहरों तथा जिला प्रमुख न्यायालय तक से जाने में सहायता करते हैं।
6. सीमान्त सड़कें :
यह संगठन 1960 में बनाया गया जिसका कार्य उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का विकास करना था। इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा वे इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुर्इ हैं।

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