Geography (NTSE/Olympiad)  

1. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

खनिजों की उपलब्धता

1. आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज :
इसमें खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं। छोटे जमाव शिराओं के रूप में और वृहत् जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। इनका निर्माण भी अधिकतर उस समय होता है जब ये तरल अथवा गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं। ऊपर आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं। मुख्य धात्विक खनिज जैसे जस्ता, ताँबा जिंक और सीसा आदि इसी तरह शिराओं व जमावों के रूप में प्राप्त होते हैं।
2. अपघटनीय चट्टानों में खनिज :
खनिजों के निर्माण की एक अन्य विधि धरातलीय चट्टानों का अपघटन है। चट्टानों के घुलनशील तत्वों के अपरदन के पश्चात् अयस्क वाली अवशिष्ट चट्टानें रह जाती है। बॉक्साइट का निर्माण इसी प्रकार होता है।
3. जलोढ़ जमाव में खनिज :
पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ जमाव के रूप में भी कुछ खनिज पाए जाते हैं। ये निक्षेप “प्लेसर निक्षेप” के नाम से जाने जाते है। इनमें प्राय: ऐसे खनिज होते हैं जो जल द्वारा घर्षित नही होते। इन खनिजों में सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम प्रमुख है।
4. अवसादी चट्टानों में खनिज :
अनेक खनिज अवसादी चट्टानों के अनेक खनिज संस्तरों या परतों में पाए जाते हैं। इनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन व जमाव का परिणाम है। कोयला तथा अन्य प्रकार के लौह अयस्कों का निर्माण लम्बी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है। अवसादी चट्टानों मे ंदूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश नमक व सोडियम सम्मिलित है। इनका निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरूप होता है।
5. महासागरीय जल में खनिज :
महासागरीय जल में भी विशाल मात्रा में खनिज पाए जाते हैं लेकिन इनमें से अधिकांश के व्यापक रूप से विसरित होने के कारण इनकी आर्थिक सार्थकता कम है। फिर भी सामान्य नमक, मैगनीशियम तथा ब्रोमाइन ज्यादातर समुद्री जल से ही प्रग्रहित होते हैं।
6. खनिजों का असमानरूप से वितरण :
1. दक्कन में खनिज : प्रायद्वीपीय चट्टानों में कोयले, धात्विक खनिज, अभ्रक व अन्य अनेक अधात्विक खनिजों के अधिकांश भंडार संचित है।
2. भारत के पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में खनिज : प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी पाश्र्वो पर गुजरात और असम की तलछटी चट्टानों में अधिकांश खनिज तेल निक्षेप पाए जाते हैं।
3. राजस्थान में खनिज : प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते है।
4. उत्तरी भारत में खनिज : उत्तरी भारत के विस्तृत जलोढ़ मैदान आर्थिक महत्त्व के खनिजों से लगभग विहीन है। ये विभिन्नताऐं खनिजों की रचना में अंतरग्रस्त भू-गर्भिक संरचना, प्रक्रियाओं और समय के कारण है।

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