Geography (NTSE/Olympiad)  

1. संसाधन एवं विकास

संसाधनों का विकास

संसाधन मनुष्य के जीवन यापन एवं जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अति आवश्यक हैं परन्तु इनके अंधाधुंध उपयोग के कारण कर्इ समस्याएँ पैदा हुर्इ हैं।
1. संसाधनों का ह्यस : कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का ह्यस।
2. संसाधनों का केन्द्रीकरण : संसाधन समाज के कुछ ही लोगों के हाथ में आ गए हैं, जिससे समाज दो हिस्सों संसाधन संपन्न एवं संसाधनहीन अर्थात् अमीर और गरीब में बँट गया।
3. वैश्विक पारिस्थितिकी संकट : संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गया है जैसे भूमंडलीय तापन, ओजोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण आदि है।
4. सतत् पोषणिय विकास : सतत् पोषणिय आर्थिक विकास का अर्थ हैं कि पर्यावरण में ह्यस हुए बिना विकास होना चाहिए तथा आने वाली पीढ़ी की आवश्यकता के अनुसार समझौता नहीं करना चाहिए। सतत् पोषणिय विकास के लिए िरेयो-डी-जेनेरीयो पृथ्वी सम्मेलन 1992 ने एजेन्डा -21 अपनाया।

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