Physics (NTSE/Olympiad)  

2. विध्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव

जनरेटर

जनरेटर
AC जनरेटर
एक AC जनरेटर की बनावट : यह एक दूसरे से विध्युत रूद्ध तांबे के तार की आयताकार कुण्डली रखता है। यह कुण्डली एक मजबूत स्थायी घोडे़ के नाल की चुम्बक के ध्रुवों के मध्य उपस्थित चुम्बकीय क्षेत्र में रखी जाती है। यह चुम्बक क्षेत्र चुम्बक (field magnet) के नाम से जानी जाती है। वास्तविकता में, विध्युत रूद्ध तांबे के तार के बहुत सारे घेरे एक लोहे की कोर पर लपेटे जाते हैं, जिसे आरमेचर कहते हैं।


कुण्डली के दो स्वतंत्र सिरे दो फिसलने वाले वलयों R1 व R2 पर जोडे़ जाते हैं। कुण्डली में उत्पन्न होने वाली धारा से कार्बन ब्रुशों B1 व B2 से बाहर ली जाती है जो हल्के रूप से फिसलने वाली वलयों पर दबे होते हैं।
एक AC जनरेटर की क्रियाविधि : माना कि कुण्डली ABCD प्रारम्भ में क्षैतिज स्थिति में है, और वामावर्त दिशा में घूर्णन कर रही है। जब कुण्डली वामावर्त दिशा में घूमती है भुजा AB नीचे की ओर गति करती है तथा भुजा CD ऊपर की ओर गति करती है। इस गति के दौरान कुण्डली चुम्बकीय बल रेखाओं को काटती है, और कुण्डली में प्रेरित धारा उत्पन्न करती है।
फ्लेंमिग के बायें हाथ के नियम के अनुसार भुजा AB के नीचे की ओर गति के दौरान प्रेरित धारा भुजा AB में B से A की ओर बहती है और भुजा CD में D से C की ओर बहती है। इस तरह से उत्पन्न धारा दो फिसलने वाले वलयों और कार्बन ब्रुशों में से बाहर ली जाती है।
आधे घूर्णन के बाद (180º से घूमने के पश्चात्) कुण्डली की भुजाएँ उनकी स्थिति बदल लेती है, भुजा AB दायी भुजा बन जाती है और भुजा CD नीचे की ओर गति करना शुरू करती है तथा भुजा AB ऊपर की ओर गति करना शुरू करती है। इस आधे घूर्णन के दौरान, प्रेरित धारा भुजा CD में C से D की ओर प्रवाहित होती है, और भुजा AB में A से B की ओर प्रवाहित होती है। दोनों फिसलनें वाली वलय की कुण्डली के साथ घूर्णन करते हैं। इसके परिणाम स्वरूप, उनकी धवता (+ और – ध्रुव) प्रत्येक आधे घूर्णन में बदलती है।
वह धारा जो उसकी ध्रुवता एक निश्चित समय अंतराल के बाद बदलती है, प्रत्यावर्ती धारा (AC) कहलाती है। इसलिए, यह विध्युत जनरेटर प्रत्यावर्ती धारा (AC) उत्पन्न करता है।
प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति : प्रत्यावर्ती धारा (AC) जो इस तरह से उत्पन्न होती है, निश्चित आवृत्ति रखती है। यह आवृत्ति एक सेकण्ड में होने वाले ध्रुवता परिवर्तन के आधी संख्या के बराबर होती है। हमारे देश में, विध्युत शक्ति उत्पादक इकाइयों द्वारा प्रदान की गर्इ प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 चक्कर प्रति सेकण्ड (या Hz) है। इसका मतलब है कि हमारे देश में उत्पन्न प्रत्यावर्ती धारा (AC) एक सेकण्ड में 100 बार ध्रुवता बदलती है।

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