Physics (NTSE/Olympiad)  

1. विध्युत

विध्युत ऊर्जा

वैद्युत ऊर्जा : जब किसी प्रतिरोध के सिरो को बैटरी से जोड़ते हैं, तो तार में मुक्त इलेक्ट्रॉन अनुगमन वेग से चलने लगते हैं तथा तार में वैद्युत धारा बहने लगती हैं। ये इलेक्ट्रॉन तार के धन आयनों से टकराते हैं तथा इससे इनकी उर्जा क्षय होता हैं। इस प्रकार बैटरी से ली गर्इ उर्जा का क्षय होता हैं। अत: इलेक्ट्रॉनो की गति बनाए रखने के लिए बैटरी से लगातार उर्जा ली जाती हैं। यह उर्जा मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा तार के आयनो को दे दी जाती हैं। इससे आयनो की उष्मीय गति बढ़ जाती हैं। फलस्वरूप तार का ताप बढ़ जाता हैं। इस प्रकार बैटरी से ली गर्इ उष्मा उर्जा के रूप में बदल जाती हैं। इसे वैद्युत उर्जा कहते हैं। इसे जूल/धारा का उष्मीय प्रभाव कहते हैं।
R = तार का प्रतिरोध
I = तार में प्रवाहित धारा
V = सिरो पर विभवान्तर
't' छोटे समय में तार से प्रवाहित आवेश q = It इसे तार में क्षय उर्जा W = Vq = VIt
&beacuse; V = IR
∴ W = VIt = I2Rt = t = Vq जूल में
यह उर्जा क्षय तार में उत्पन्न उष्मा के मान के बराबर या बैटरी द्वारा किये गये कार्य के बराबर होता है।

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