जीव विज्ञान


अध्याय : 9. प्राकृतिक संसाधनों का प्रबन्धन

वन तथा वन्यजीव

भागीदार (स्टाकहॉल्डर) : स्टाकहॉल्डर व्यक्ति या जनसमूह है, जिसका सम्पत्ति में बंधित लाभ होता है। वनो में चार प्रकार के स्टाकहॉल्डर होते है। स्थानीय, वन विभाग, उद्योगपति, वन्यजीव तथा प्रकृति प्रेमी।
अवनीकरण : एक क्षेत्रा के वनावरण का प्रतिस्थापन, कमी या नाश अवनीकरण कहलाता है। यह वृक्षो के अत्यधिक काटने, अतिचारण, एकल संवर्धन, खण्डन तथा वनो की सफार्इ के कारण होता है।
अवनीकरण के कारण है।
मृदा अपरदन : पादपो के आवरण के प्रतिस्थापन से वायु तथा जल द्वारा उर्वर मृदा हट जाती है, तत्पश्चात् ऊपरी मृदा हट जाती है तथा क्षेत्रा बंजर बन जाता है।
मरूस्थलीकरण : धरातल में वन आवरण का प्रतिस्थापन क्षैत्रा को सूखा बनाता है। गर्म मौसम में मृदा ढीली हो जाती है।
बाढ़ : वर्षा के मौसम में अस्थायी छोटे नदी-नाले असुरक्षित मृदा द्वारा अवशोषण क्षमता में कमी के कारण बनते है।
वन्यजीव का अपàासन : अवनीकरण वन्य जीवों तथा पादपों के प्राकृतिक आवास का अपह्यसन करता है। इसलिए वन्यजीव नष्ट होता है।
जलवायु परिवर्तन : वन आवरण की अनुपस्थिति में, गर्मियाँ अधिक गर्म जबकि सर्दियां अत्यधिक ठण्डी हो जाती है। वर्षा की आवृत्ति घट जाती है।
सुपोषणीय प्रबन्ध : सुपोषणीय प्रबन्ध संसाधनों का इस प्रकार नियमित उपयोग करना की वर्तमान पीढ़ी को उत्पादों तथा सेवाओं की समान उपलब्धता तथा सतत् प्रवाह प्राप्त होता रहे, जबकि पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाये अगली पीढ़ी के लिए भी प्राप्त होना सुनिश्चित हो।

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