जीव विज्ञान


अध्याय : 2. श्वसन तंत्र

मानव में श्वसन तंत्रा

मानव में श्वसन तंत्रा निम्न भागों से मिलकर बना होता है -
नासाछिद्र :
इसे बाह्य नासिका भी कहते हैं।
नासावेश्म :
नासापट्टीकाओं के कारण नासिका गुहा 2 नासावेश्म में विभाजित हो जाती है।
आंतरिक नासिका :
ये नासावेश्म का अंतिम छिद्र है जो आगे ग्रसनी से जुड़ा होता है।
ग्रसनी :
ग्रसनी भोजन तथा वायु दोनों के लिये मार्ग प्रदान करता है।
कण्ठ द्वार या ग्लॉटिस :
यह ग्रसनी का अंतिम भाग होता है। जिसमें एक खाँच नुमा संरचना पायी जाती है। जो कि एक पर्णनुमा संरचना जिसे एपीग्लॉटिस कहते हैं। यह भोजन को निगलते समय बंद हो जाती है।
कण्ठ :
इसे स्वर पेटी अथवा पोमा आदमी भी कहा जाता है।
वाक रज्जू :
कण्ठ में 2 जोड़ी वाक् रज्जू पाये जाते हैं। जिसमें बाहरी जोड़ा कृित्राम वाक् रज्जू तथा भीतरी जोड़ा वास्तविक वाक् रज्जू कहलाते हैं। जब वायु कण्ठ में प्रवेश करती है तो वाक् रज्जूओं में कम्पन्न के फलस्वरूप ध्वनि उत्पन्न होती है।
श्वसनली :
यह एक लंबी नलिका है जो कि ग्रासनाल के अधर तल पर स्थित होती है। इसमें उपस्थित उपास्थिल छल्ले इसकी दीवारों को आपस में चिपकने से रोकते हैं।
प्राथमिक श्वसनिकाऐं :
यह एक जोड़ी पतली भित्ती वाली नलिकानुमा संरचना है जो कि श्वासनली के विभाजन से बनती है। ये और अधिक विभाजित होकर वायुकोश में समाप्त होती है।
फेफड़े :
ये एक जोड़ी, वक्ष गुहा में हृदय के एक तरफ स्थित तथा प्लूरल कला से आवरित होते हैं।

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