जीव विज्ञान


अध्याय : 8. हमारा पर्यावरण

पारिस्थितिक तंत्रा की संरचना

पारिस्थितिक तंत्रा में दो प्रकार के घटक होते है, जैविक तथा अजैविक।
जैविक घटक:
इसमें पारिस्थितिक तंत्रा में उपस्थित सभी जीव सम्मलित है। एक पारिस्थितिक तंत्रा में विभिन्न जैविक जीवों की जनसंख्या के संघटन को जैविक समुदाय भी कहते है। स्वपोषीयो को उत्पादक भी कहा जाता है। सभी दूसरे जीव जो अपने स्वंय का भोजन निर्मित करने के अयोग्य है, विषमपोषी कहलाते है। विषमपोषी दो प्रकार के होते है उपभोक्ता तथा अपघटक।
उत्पादक : ये हरे पादप होते है, नील हरित शैवाल (= सायनोबेक्टिरिया), कुछ जीवाणु तथा अल्प मुक्त प्लावी स्वपोषी जीव पादप प्लवक कहलाते है। इन सभी में पर्णहरित होता है। भोजन में निहित ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा होती है। यह सूर्य ऊर्जा का रूपान्तरण होती है, जो उत्पादको के पर्णहरित की सहायता द्वारा अवशोषित होती है। इसलीय उत्पादको को रूपान्तरक तथा प्रवर्तक भी कहते है।

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