जीव विज्ञान


अध्याय : 3. परिवहन

रक्त समूह

प्रतिजन तथा प्रतिरक्षी की पारस्परिक क्रिया के आधार पर लैण्ड स्टीनर ने मानव रूधिर को 4 वर्गों में विभाजित किया। जो निम्न प्रकार है - A, B, AB तथा O।
'O' रक्त वर्ग वाला मनुष्य सभी वर्ग वालों को अपना रक्त दे सकते है। अत: इन्हे सर्वदात्राी कहा जाता है।
'AB' रक्त वर्ग वाले मनुष्य सभी वर्ग से रक्त ले सकते है अंत: उन्हें सर्वग्राही कहा जाता है।
रक्त वर्ग 'O' में लालरूधिर कोशिकाओं की सतह पर प्रतिजन का अभाव होता है। अत: ग्राही की रूधिर के साथ कोर्इ प्रतिक्रिया नहीं होती
रक्त वर्ग 'AB' के प्लाज्मा में प्रतिरक्षी का अभाव होता है। अत: दाता के रक्त के साथ कोर्इ प्रतिक्रिया संपत्रा नही होती।
Rh कारक (Rhesus factor) : यह एक प्रकार का प्रतिजन होता है। जो रीसस बन्दरों के रक्त में सर्वप्रथम पाया गया था। Rh कारक की उपस्थिति तथा अनुपस्थिति के आधार पर ही मानव रक्त की Rh-धनात्मक (Rh+) तथा Rh ऋणात्मक (Rh–) कहा जाता है। Rh- कारक शिशु जन्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यदि शिशु का रक्त Rh+ तथा माता का रक्त Rh– है तो प्रतिरक्षी आक्रमण करने के कारण शिशु की मृत्यु हो सकती है।

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