Chemistry


अध्याय : 4. अम्ल, क्षार तथा लवण

सूचक

एक सूचक को निम्न प्रकार परिभाषित किया जा सकता है एक-अम्ल-क्षार सूचक ऐसे पदार्थ के रुप में परिभाषित हो सकता है जो अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में भिन्न रंग देता है। लिटमस, मेथिल ओरेन्ज तथा फिनॉल्फ्थेलीन, ऐसे कुछ सर्वविदित उपयोग में लिये जाने वाले अम्ल-क्षार सूचक है जो निम्नानुसार रंग बदलते है।

लिटमस : यह प्राकृतिक रंजक है जो एक छोटे पौधे से बना होता है जिसे लिकेन कहते है तथा नीले तथा लाल लिटमस विलयनों को लिकेन की दो भिन्न किस्मो से बनाया जाता है।
लिटमस पेपर : नीले या लाल लिटमस पेपर को फिल्टर पेपर की एक स्ट्रीप को नीले या लाल लिटमस विलयन विलयन में डुबोकर बनाया जाता है। इसके पश्चात् पेपर को विलयन से बाहर निकालकर सुखा लिया जाता है।
नीला लिटमस पेपर अम्लीय विलयन में लाल हो जाता है तथा लाल, लिटमस क्षारीय विलयन में नीला हो जाता है .
फिनॉलफथेलीन : यह रंगहीन यौगिक है। फिनॉलफथेलीन के एल्कोहॉलिक विलयन को सूचक के रुप में प्रयुक्त किया जाता है। अम्लीय माध्यम में यह रंगहीन होता है परन्तु क्षारीय माध्यम में यह गुलाबी (लाल) हो जाता है।
मेथिल ऑरेन्ज : ठोसीय मेथिल ऑरेन्ज की बहुत कम मात्रा को गर्म जल में घोलकर, फिल्टरित किया जाता है। फिल्टरेट को, एक सूचक के रुप में प्रयुक्त किया जाता है, यह अम्लीय माध्यम में लाल तथा क्षारीय माध्यम में पीला होता है।

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