Democratic Politics


अध्याय : 4. जाति, धर्म और लैंगिक मसले

धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति

भारत सहित अनेक देशों में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। लैंगिक विभाजन के विपरीत धार्मिक विभाजन अक्सर राजनीति के मैदान में अभिव्यक्त होता है।
(a) धर्म तथा राजनीति में अन्तर :
1. गांधी जी कहा करते थे कि धर्म को कभी भी राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता। धर्म से उनका मतलब हिंदू या इस्लाम जैसे धर्म से न होकर नैतिक मूल्यों से था जो सभी धर्मों से जुड़े हैं। राजनीति धर्म द्वारा स्थापित मूल्यों से निर्देशित होनी चाहिए।
2. अपने देश के मानवधिकार समूहों का कहना है कि इस देश में सांप्रदायिक दंगों में मरने वाले ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदायों के हैं। उनकी माँग है कि सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए विशेष कदम उठाए।
3. महिला-आंदोलन का कहना है कि सभी धर्मों में वर्णित पारिवारिक कानून महिलाओं से भेदभाव करते हैं। इस आंदोलन की माँग है कि सरकार को इन कानूनों को समतामूलक बनाने के लिए उनमें बदलाव करने चाहिए।
विभिन्न धर्मों से निकले विचार, आदर्श और मूल्य राजनीति में एक भूमिका निभा सकते हैं। लोगों को एक धार्मिक समुदाय के तौर पर अपनी जरूरतों, हितों और माँगों को राजनीति में उठाने का अधिकार होना चाहिए। शासन सभी धर्मों के साथ समान बरताव करता है तो उसके ऐसे कामों में कोर्इ बुरार्इ नहीं हैं।

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