Democratic Politics


अध्याय : 3. लोकतंत्रा के परिणाम

आर्थिक संवृद्धि और विकास

अगर हम 1950 से 2000 के बीच के सभी लोकतांित्राक शासनों और तानाशाहियों के कामकाज की तुलना करें तो पाऐंगे कि आर्थिक संवृद्धि के मामले में तानाशाहियो का रिकॉर्ड थोड़ा बेहतर है। साक्ष्य दर्शाते हैं कि साधारणतया कर्इ लोकतंत्रा इन अपेक्षाओं को पुरा नही करते।
उच्चतर आर्थिक संवृद्धि हासिल करने में लोकतांित्राक शासन की यह अक्षमता हमारे लिए चिंता का कारण है। पर अकेले इसी कारण से लोकतंत्रा को खारिज नहीं किया जा सकता।
तानाशाही वाले कम विकसित देशों और लोकतांित्राक व्यवस्था वाले कम विकसित देशों के बीच का अंतर नगण्य सा है। पर हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस मामले में लोकतांित्राक व्यवस्था तानाशाही से नहीं पिछड़े।
आर्थिक संवृद्धि और विकास
लोकतांित्राक शासन के अन्दर भी आर्थिक असमानता हो सकती है। दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे देशों में ऊपरी 20 फीसदी लोगों का ही कुल राष्ट्रीय आय के 60 फीसदी हिस्से पर कब्जा है जबकि सबसे नीचे के 20 फीसदी लोग राष्ट्रीय आये के मात्रा 3 फीसदी हिस्से पर जीवन बसर करते हैं। डेनमार्क और हंगरी जैसे मुल्क इस मामले में कहीं ज्यादा बेहतर कहे जाऐंगे।

असमानता और गरीबी में कमी
लोकतांित्राक व्यवस्था राजनीतिक समानता पर आधारित होती है। प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का वजन बराबर होता है। व्यक्तियों को राजनीतिक क्षेत्रा में परस्पर बराबरी का दर्जा तो मिल जाता है लेकिन इसके साथ-साथ हम आर्थिक असमानता को भी बढ़ता हुआ पाते हैं। मुट्ठी भर धनकुबेर आय और संपत्ति में अपने अनुपात से बहुत ज्यादा हिस्सा पाते हैं। इतना ही नहीं, देश की कुल आय में उनका हिस्सा भी बढ़ता गया है। समाज के सबसे निचले हिस्से के लोगों को जीवन बसर करने के लिए काफी कम साधन मिलते हैं। उनकी आमदनी गिरती गर्इ है। कर्इ बार उन्हें भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा और इलाज जैसे बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मुश्किल आती है।
वास्तविक जीवन में लोकतांित्राक व्यवस्थाऐं आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज्यादा सफल नहीं हो पार्इं हैं। हमारे मतदाताओं में गरीबों की संख्या काफी बड़ी है इसलिए कोर्इ भी पार्टी उनके मतों से हाथ धोना नहीं चाहेगी। फिर भी लोकतांित्राक ढंग से निर्वाचित सरकारें गरीबी के सवाल पर उतना ध्यान देने को तत्पर नहीं जान पड़तीं जितने कि आप उनसे उम्मीद करतें हैं कुछ अन्य देशों में हालत इससे भी ज्यादा खराब है। बांग्लादेश में आधी से ज्यादा आबादी गरीबी में जीवन गुजारती है। अनेक गरीब देशों के लोग अपनी खाद्य-आपूर्ति के लिए भी अब अमीर देशों पर निर्भर हो गए है।

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