Democratic Politics


अध्याय : 3. लोकतंत्रा के परिणाम

उत्तरदायी, जिम्मेदार और वैध शासन

कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोकतंत्रा को पूरा करना ही चाहिए। लोकतंत्रा में सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि लोंगों का अपना शासक चुनने का अधिकार और शासकों पर नियंत्राण बरकरार रहे। वक्त-जरूरत और यथासंभव इन चीजों के लिए लोगों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी करने में सक्षम होना चाहिए ताकि लोगों के प्रति जिम्मेदार सरकार बन सके और सरकार लोगों की जरूरतों और उम्मीदों पर ध्यान दें।
क्या लोकतांित्राक सरकार कार्यकुशल होती है ?
क्या प्रभावी होती है ?: कुछ लोगों का मानना है कि लोकतंत्रा में कम प्रभावी सरकारें बनती हैं। निश्चित रूप से यह सही है कि अलोकतांित्राक सरकारों को विधायिका का सामना नहीं करना होता। उन्हें बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नजरिए का ख्याल नहीं रखना पड़ता। लोकतंत्रा में बातचीत और मोलतोल के आधार पर काम चलता है। इसकी तुलना में लोकतांित्राक सरकार सारी प्रक्रिया को पूरा करने में ज्यादा समय ले सकती है। लेकिन इसने पूरी प्रक्रिया को माना है इसलिए इस बात की ज्यादा संभावना है कि लोग उसके फैसलों को मानेंगे और वे ज्यादा प्रभावी होंगे। इस प्रकार लोकतंत्रा में फैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता। लोकतंत्रा में इस बात की पक्की व्यवस्था होती है कि फैसले कुछ कायदे-कानून के अनुसार होंगे और अगर कोर्इ नागरिक यह जानना चाहे कि फैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नही तो वह इसका पता कर सकता है उसे यह न सिर्फ जानने का अधिकार है बल्कि उसके पास इसके साधन भी उपलब्ध हैं। इसे पारदर्शिता कहते हैं।
हम यह उम्मीद भी कर सकते हैं कि लोकतांित्राक सरकार नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने और खुद को उनके प्रति जवाबदेह बनाने वाली कार्य विधि भी विकसित कर लेती है। अगर हम इन नतीजों के आधार पर लोकतांित्राक व्यवस्था को तौलना चाहते हैं तो आपको इन संस्थाओं और व्यवहारों पर गौर करना होगा। नियमित और निष्पक्ष चुनाव, प्रमुख नीतियों और नए कानूनों पर खुली सार्वजनिक चर्चा और सरकार तथा इसके कामकाज के बारे में जानकारी पाने का अधिकार। इन पैमाने पर लोकतांित्राक शासकों का रिकार्ड मिला-जुला रहा है। नियमित और निष्पक्ष चुनाव कराने और खुली सार्वजनिक चर्जा के लिए उपयुक्त स्थितियाँ बनाने के मामले में लोकतांित्राक व्यवस्थाऐं ज्यादा सफल हुर्इ हैं पर ऐसे चुनाव कराने में जिसमें सबको अवसर मिले अथवा हर फैसले पर सार्वजनिक बहस कराने के मामले में उनका रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। नागरिकों के साथ सूचना का साझा करने के मामले में भी उनका रिकार्ड खराब रहा है। पर इनकी तुलना जब हम गैर-लोकतांित्राक शासनों से करते हैं तो इन क्षेत्रों का भी उनका प्रदर्शन बेहतर ही ठहरता है।
एक व्यापक धरातल पर लोकतांित्राक सरकारों से यह उम्मीद करना उचित ही है कि वे लोगों की जरूरतों और माँगों का ध्यान रखने वाली हो और कुल मिलाकर भ्रष्टाचार से मुक्त शासन दें। इन दो मामलों में भी लोकतांित्राक सरकारों का रिकॉर्ड प्रभावशाली नहीं है। लोकतांित्राक व्यवस्थाऐं अक्सर लोगों को उनकी जरूरतो के लिए तरसाती हैं और आबादी के एक बड़े हिस्से की माँगों की उपेक्षा करती है। भ्रष्टाचार के आम किस्से इस बात की गवाही देते हैं कि लोकतांित्राक व्यवस्था इस बुरार्इ से मुक्त नहीं है। पर इसके साथ इस पर भी ध्यान दें कि गैर-लोकतांित्राक सरकारें कम भ्रष्ट हैं या लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील हैं- यह कहने का कोर्इ आधर नहीं है।
एक मामले में लोकतांित्राक शासन व्यवस्था निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर है : यह वैध शासन व्यवस्था है। यह सुस्त हो सकती है, कम कार्य-कुशल हो सकती है, इसमें भ्रष्टाचार हो सकता है, यह लोगों की जरूरतों की कुछ हद तक अनदेखी कर सकती है लेकिन लोकतांित्राक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन व्यवस्था है। इसी कारण पूरी दुनिया में लोकतंत्रा के विचार के प्रति जबरदस्त समर्थन का भाव है

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