Economics


अध्याय : 5. उपभोक्ता अधिकार

उपभोक्ता आंदोलन

उपभोक्ता आन्दोलन का प्रारम्भ उपभोक्ताओं के असंतोष के कारण हुआ, क्योंकि विक्रेता कर्इ अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में शामिल होते थे। 80’s से पहले बाजार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोर्इ कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नही थी।
भारत में, ‘सामाजिक बल’ के रूप में उपभोक्ता आंदोलन का जन्म अनैतिक और अनुचित व्यवसाय कार्यो से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता के साथ हुआ। खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, उच्च मूल्य की वजह से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ। हाल ही मे, भारत में उपभोक्ता समूह की संख्या में भारी वृद्धि को देखा गया है। यह इसलिए हैं क्योंकि निजी क्षेत्राक द्वारा उपभोक्ता शोषण की स्थितियाँ अत्यधिक हो रही है। विभिन्न उपभोक्ता की गतिविधियों के लिए सरकार ने नियम बनाया जो उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम हैं, जो COPRA के नाम से प्रसिद्ध है।
अधिनियम के मुख्य लक्षण :
1. अधिनियम सभी वस्तुओं तथा सेवाओं पर लागू होताा है।
2. यह क्षेत्रा सभी क्षेत्राक जैसे सार्वजनिक, निजी अथवा सहकारी को शामिल करता है।

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