Geography


अध्याय : 2. विनिर्माण उद्योग

कृषि आधारित उद्योग

सूती वस्त्रा पटसन, रेशम, ऊनी वस्त्रा, चीनी तथा वनस्पति तेल आदि उद्योग कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर आधारित हैं।
वस्त्रा उद्योग :
1. भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्रा उद्योग का अपना अलग महत्त्व है क्योंकि इसका औद्योगिक उत्पादन में 14 % योगदान है।
2. यह लगभग 350 लाख व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाकर कृषि के पश्चात् दूसरा बड़ा उद्योग है तथा लगभग 24.6 % विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
3. सकल घरेलू उत्पाद में इसकी भागीदारी लगभग 4 प्रतिशत है। देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।
सूती वस्त्रा उद्योग :
1. प्राचीन भारत में सूती वस्त्रा हाथ से कतार्इ और हथकरघा बुनार्इ तकनीकों से बनाये जाते थे।
2. आज देश में लगभग 1600 सूती तथा कृित्राम रेशे की कपड़ा मिले हैं। इनमें से 80 प्रतिशत निजी क्षेत्रा में तथा शेष सार्वजनिक व सरकारी क्षेत्रा में हैं। इनके अंतर्गत कर्इ हजार छोटी इकाइयाँ हैं जिनमें 4 से 10 हथकरघे हैं।
वस़्त्रा उद्योग में अतिरिक्त मूल्य उत्पाद

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