History


अध्याय : 2. औद्योगीकरण का युग

वस्तुओं के लिए बाजार

ब्रिटिश निर्माताओं ने भारतीय बाज़ार पर क़ब्जे के लिए प्रयास किया और किस तरह भारतीय बुनकरों व दस्तकारों, व्यापारियों व उद्योगपतियों ने औपनिवेशिक नियंत्राण का विरोध किया, आयात शुल्क सुरक्षा के लिए माँग उठार्इ, अपने लिए जगह बनार्इ और अपने माल के बाज़ार को फैलाने का प्रयास किया।
(a) उत्पादकों द्वारा उनके बाज़ारों में वृद्धि करने के लिए प्रयोग की जाने वाली विधियाँ :
(i) विज्ञापन : विज्ञापन विभिन्न उत्पादों को ज़रूरी और वांछनीय बना लेते हैं। वे लोगों की सोच बदल देते हैं और नयी जरूरतें पैदा कर देते है। औद्योगीकरण की शुरूआत से ही विज्ञापनों ने विभिन्न उत्पादों के बाज़ार को फैलाने में और एक नयी उपभोक्ता संस्कृति रचने में अपनी भूमिका निभार्इ है।
(ii) लेबल लगाना : जब मैनचेस्टर के उद्योगपतियों ने भारत में कपड़ा बेचना शुरू किया तो वे कपड़े के बंडलों पर लेबल लगाते थे। लेबल का फायदा यह होता था कि खरीदारों को कंपनी का नाम व उत्पादन की जगह पता चल जाती थी। लेबल ही चीज़ों की गुणवत्ता का प्रतीक भी था। जब किसी लेबल पर मोटे अक्षरों में ‘मेड इन मैनचेस्टर’ लिखा दिखार्इ देता था तथा उन सपर तस्वीरें भी बनी होती थीं जो अक्सर बहुत सुंदर होती थी।
(iii) कैलेंडर : उन्नीसवीं सदी के आखिर मे निर्माता अपने उत्पादों को बेचने के लिए कैलेंडर छपवाने लगे थे। अखबारों और पित्राकाओं को तो पढ़े-लिखे लोग ही समझ सकते थे लेकिन कैलेंडर उनको भी समझ में आ जाते थे जो पढ़ नहीं सकते थे। चाय की दुकानों, दफ्तरों व मध्यवर्गीय घरों में ये कैलेंडर लटके रहते थे। जो इन कैलेंडरों को लगाते थे वे विज्ञापन को भी हर रोज, पूरे साल देखते थे। इन कैलेंडरों में भी नए उत्पादों को बेचने के लिए देवताओं की तसवीर होती थी।
(iv) देवी-देवताओं तथा महत्वूपर्ण व्यक्तियों की तस्वीरें : इन लेबलों पर भारतीय देवी-देवताओं की तसवीरें प्राय होती थीं। देवी-देवताओं की तसवीर के बहाने निर्माता ये दिखाने की कोशिश करते थे कि र्इश्वर भी चाहता है कि लोग उस चीज़ को खरीदें। कृष्ण या सरस्वती की तसवीरों का फ़ायदा ये होता था कि विदेशों में बनी चीज़ भी भारतीयों को जानी-पहचानी सी लगती थी। देवताओं की तसवीरों की तरह महत्वपूर्ण व्यक्तियों, सम्राटों व नवाबों की तस्वीरें भी विज्ञापनों व कैलेंडरों में खूब इस्तेमाल होती थीं। इनका संदेश अक्सर यह होता था : अगर आप इस शाही व्यक्ति का सम्मान करते हैं तो इस उत्पाद का भी सम्मान कीजिए, अगर इस उत्पाद को राजा इस्तेमाल करते हैं या उसे शाही निर्देश से बनाया गया हैं , तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।
(v) भारतीय निर्माताओं द्वारा विज्ञापन : जब भारतीय निर्माताओं ने विज्ञापन बनाए तो उनमे राष्ट्रवादी संदेश साफ़ दिखार्इ देता था। इनका आशय यह था कि अगर आप राष्ट्र की परवाह करते हैं तो उन चीज़ों को खरीदिए जिन्हें भारतीयों ने बनाया है। ये विज्ञापन स्वदेशी के राष्ट्रवादी संदेश के वाहक बन गए थे।

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